नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकारी और मान्यता प्राप्त बीएड कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े मामले में राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने समय मिलने के बावजूद जवाब पेश नहीं किए जाने पर नाराजगी भी जताई।
जनहित याचिका में कहा गया है कि कई बीएड कॉलेजों में छात्रों से पूरी फीस ली जा रही है…लेकिन पर्याप्त शिक्षक और जरूरी शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और विद्यार्थियों को अपेक्षित शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि कई संस्थानों का संचालन लगातार बढ़ाया जा रहा है…जबकि वहां बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी बनी हुई है। उनका कहना है कि इससे शिक्षक प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
अदालत ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब दो सप्ताह बाद होगी।
यह जनहित याचिका पिथौरागढ़ के अधिवक्ता डॉ. राजेश पांडे ने दायर की है…जिसमें प्रदेश में बीएड शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और तय मानकों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
