ख़बर शेयर करें -

हरिद्वार: उत्तराखंड सरकार संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए नई पहल करने जा रही है आने वाले कुंभ के दौरान हरिद्वार और ऋषिकेश में देश-विदेश से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का स्वागत संस्कृत शब्दों और श्लोकों के साथ किया जाएगा।

सरकार की योजना के तहत यात्रियों को ‘वेलकम’ की जगह ‘स्वागतम्’ जैसे संस्कृत शब्द सुनने को मिलेंगे इसका उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और संस्कृत भाषा को देश-दुनिया तक पहुंचाना है।

100 से ज्यादा लोगों को मिलेगा प्रशिक्षण

उत्तराखंड संस्कृत संस्थान जल्द ही 100 से अधिक लोगों को संस्कृत भाषा का प्रशिक्षण देने की तैयारी कर रहा है। इसमें रेलवे स्टेशन के कुली, ऑटो और टैक्सी चालक, बस कंडक्टर समेत अन्य स्थानीय लोगों को शामिल किया जाएगा।

यह भी पढ़ें 👉  धामी सरकार का बड़ा तोहफा : 6 लाख का फ्लैट सिर्फ 3 लाख में, जानिए कौन उठा सकता है फायदा

प्रशिक्षण में लोगों को यात्रियों से बातचीत में इस्तेमाल होने वाले आसान संस्कृत शब्द और छोटे-छोटे वाक्य सिखाए जाएंगे योजना के अनुसार अलग-अलग वर्गों के लोगों को हर महीने प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कुंभ के प्रचार में भी संस्कृत का इस्तेमाल

कुंभ मेले के प्रचार-प्रसार में भी संस्कृत भाषा को प्रमुखता देने की तैयारी है आयोजन से जुड़े प्रतीक चिन्हों और प्रचार सामग्री में संस्कृत का इस्तेमाल किया जाएगा। कुंभ से संबंधित विभिन्न जानकारियों और गतिविधियों का प्रचार भी संस्कृत के माध्यम से करने की योजना है।

अपर कुंभ मेला अधिकारी दयानंद सरस्वती के अनुसार इस पहल के लिए उत्तराखंड संस्कृत संस्थान को बजट की मंजूरी दी जा चुकी है।

यह भी पढ़ें 👉  किराया विवाद में टैक्सी चालक के साथ शर्मनाक हरकत, जूतों की माला पहनाकर किया अपमान; 4 लोगों पर मुकदमा

कुलियों से होगी शुरुआत

सरकार की इस पहल की शुरुआत सबसे पहले हरिद्वार रेलवे स्टेशन के कुलियों से किए जाने की बात कही गई है कुली संगठन ने भी इस अभियान का स्वागत किया है।

कुली संगठन के अध्यक्ष किशन सिंह ने कहा कि वे संस्कृत के सामान्य शब्द सीखकर हरिद्वार आने वाले यात्रियों का ‘स्वागतम्’ कहकर स्वागत करेंगे।

सरकार का मानना है कि कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में संस्कृत के अधिक इस्तेमाल से उत्तराखंड की प्राचीन भाषा, संस्कृति और ‘देवभूमि’ की पहचान का संदेश देश-विदेश तक पहुंचाया जा सकेगा।