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रुद्रपुर:देश के जाने-माने कृषि वैज्ञानिक और शिक्षाविद् डॉ. प्रेम लाल गौतम को कृषि विज्ञान, जैव विविधता संरक्षण और किसानों के अधिकारों के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है। इस उपलब्धि से कृषि वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और पंतनगर विश्वविद्यालय परिवार में खुशी की लहर है।

वर्तमान में डॉ. प्रेम लाल गौतम, बिहार स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कृषि अनुसंधान, शिक्षा और किसानों के हितों के लिए लंबे समय तक महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।

डॉ. गौतम ने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के कुलपति के रूप में वर्ष 2002 से 2007 तक कार्य किया। उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय ने शिक्षा, शोध और कृषि प्रसार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हुई।

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वर्ष 2006 में उनके मार्गदर्शन में पंतनगर विश्वविद्यालय को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का प्रतिष्ठित “सरदार पटेल उत्कृष्ट कृषि संस्थान पुरस्कार” प्राप्त हुआ। यह सम्मान विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट शैक्षणिक और शोध उपलब्धियों का प्रमाण माना जाता है।

डॉ. प्रेम लाल गौतम गेहूं प्रजनन (व्हीट ब्रीडिंग) के क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध वैज्ञानिक रहे हैं। उन्होंने उन्नत फसल किस्मों के विकास, कृषि अनुसंधान और जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। किसानों के अधिकारों की रक्षा और कृषि संसाधनों के संरक्षण के लिए भी उन्होंने कई अहम पहल कीं।

भारत में पादप जर्मप्लाज्म पंजीकरण प्रणाली को विकसित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही…जिससे कृषि जैव विविधता संरक्षण को नई दिशा मिली। इसके अलावा उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।

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डॉ. गौतम राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों का नेतृत्व भी कर चुके हैं। उनके कार्यों ने कृषि अनुसंधान और किसानों के हितों को मजबूत आधार प्रदान किया है।

पद्मश्री सम्मान मिलने पर देशभर के कृषि वैज्ञानिकों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं ने उन्हें बधाई दी है। पंतनगर विश्वविद्यालय परिवार ने इसे पूरे संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया है। उनका जीवन और कार्य कृषि विकास, नवाचार और किसानों के कल्याण के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक मिसाल माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. प्रेम लाल गौतम को मिला यह सम्मान आने वाली पीढ़ी के कृषि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।