अल्मोड़ा: कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सेना मेडल से सम्मानित नायक हरी बहादुर घले की शहादत आज भी लोगों को देशभक्ति का संदेश दे रही है। उनके इकलौते बेटे कृष्णा घले ने भी पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा का संकल्प पूरा किया है।
जब हरी बहादुर घले कारगिल युद्ध में शहीद हुए, उस समय कृष्णा की उम्र केवल छह वर्ष थी। परिवार ने कठिन परिस्थितियों में बच्चों का पालन-पोषण किया। उनकी मां सरस्वती घले ने पिता की वीरता और बलिदान की कहानियां सुनाकर बेटे के मन में देश सेवा का जज्बा जगाया।
कृष्णा वर्ष 2014 में भारतीय सेना की कुमाऊं रेजीमेंट में भर्ती हुए और वर्तमान में मेघालय में तैनात हैं। उनका कहना है कि सेना की वर्दी उनके लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि पिता के अधूरे सपनों और बलिदान का सम्मान है। कारगिल विजय दिवस पर उनका परिवार आज भी अपने वीर सपूत को गर्व के साथ याद करता है।
