देहरादून : वर्ष 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ से पहले उत्तराखंड की सड़क कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं अंतिम चरण में हैं। इनके पूरा होने के बाद दिल्ली से हरिद्वार, ऋषिकेश, चारधाम, गढ़वाल और कुमाऊं तक की यात्रा पहले की तुलना में अधिक तेज…सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगी।
सबसे बड़ी राहत हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों को मिलेगी। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाली नई सड़क तैयार होने के बाद लाखों लोगों को शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे यात्रा का समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी और ट्रैफिक जाम की समस्या में भी बड़ी कमी आएगी।
एनएचएआई की लगभग 51 किलोमीटर लंबी छह लेन एक्सेस कंट्रोल्ड स्पर रोड का अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है। यह मार्ग हलगोया मुस्तकम से शुरू होकर भड़ेड़ी राजपूताना स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-58 तक जाएगा और सीधे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा। इसके चालू होने के बाद दिल्ली, मेरठ, सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले यात्रियों की यात्रा काफी आसान हो जाएगी।
करीब 15 किलोमीटर लंबे हरिद्वार बाईपास का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। यह मार्ग बहादराबाद से शुरू होकर चंडी देवी मंदिर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-34 तक पहुंचेगा। इसके शुरू होने से हर की पैड़ी, चंडी चौक, शंकराचार्य चौक और शहर के अन्य व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा।
अर्धकुंभ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए यह बाईपास यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही सिडकुल क्षेत्र के उद्योगों और मालवाहक वाहनों को भी बड़ी सुविधा मिलेगी।
नई सड़क परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हरिद्वार, ऋषिकेश, चारधाम, गढ़वाल और कुमाऊं के बीच बेहतर सड़क संपर्क स्थापित होगा। इसका लाभ धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एडवेंचर टूरिज्म, उद्योग, व्यापार और स्थानीय उत्पादों के परिवहन को भी मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
हरिद्वार-मुजफ्फरनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुरकाजी, फलौदा, मंगलौर, बहादराबाद और ज्वालापुर जैसे व्यस्त स्थानों पर फ्लाईओवर, अंडरपास और सर्विस रोड का निर्माण किया जा रहा है। इन सुविधाओं के शुरू होने से दुर्घटनाओं में कमी आएगी, ट्रैफिक अधिक व्यवस्थित होगा और लंबे जाम से राहत मिलेगी।
इन परियोजनाओं के साथ आधुनिक एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टमभी लगाया जा रहा है। इसके जरिए ट्रैफिक की रियल-टाइम निगरानी इलेक्ट्रॉनिक सूचना प्रणाली नियमों के पालन की मॉनिटरिंग और दुर्घटना या आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे यात्रियों की सुरक्षा और सड़क प्रबंधन दोनों बेहतर होंगे।
उत्तराखंड सरकार का कहना है कि इन सभी परियोजनाओं को वर्ष 2027 के अर्धकुंभ से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद दिल्ली से हरिद्वार, ऋषिकेश, चारधाम, गढ़वाल और कुमाऊं तक हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क तैयार होगा, जिससे धार्मिक पर्यटन, निवेश, व्यापार और क्षेत्रीय विकास को लंबे समय तक लाभ मिलने की उम्मीद है।
