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देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए नई प्रणाली लागू कर दी है। अब मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण काम करेगा। इसके साथ ही प्रदेश के सभी मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए शिक्षा विभाग से मान्यता लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब केवल वही मदरसे संचालित हो सकेंगे…जो शिक्षा विभाग द्वारा तय मानकों को पूरा करेंगे। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

प्रदेश में वर्तमान में 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हैं। इनमें से अब तक 158 मदरसों ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के पोर्टल पर मान्यता के लिए आवेदन किया है। शिक्षा विभाग इन सभी संस्थानों का भौतिक सत्यापन करेगा और निर्धारित मानकों के आधार पर मान्यता प्रदान करेगा।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई व्यवस्था के तहत नौ अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए। इनमें सात मदरसे, एक सिख समुदाय का शिक्षण संस्थान और एक जैन समुदाय का शिक्षण संस्थान शामिल हैं।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थानों के लिए एक समान व्यवस्था लागू होगी। संस्थान सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे…जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी।

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शिक्षा विभाग का कहना है कि जिन संस्थानों में निर्धारित मानकों के अनुसार भवन, शैक्षणिक व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी, उन्हें सुधार के लिए समय दिया जाएगा। यदि तय अवधि में भी मानकों का पालन नहीं किया गया…तो ऐसे संस्थानों को मान्यता नहीं मिलेगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक शिक्षा, बेहतर निगरानी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही विद्यार्थियों को शिक्षा विभाग के निर्धारित मानकों के अनुरूप बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया जा सकेगा।