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देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के श्रमिकों के हित में दो नई नियमावलियों को मंजूरी दी है। इनका उद्देश्य मजदूरों को समय पर वेतन, बेहतर कार्य परिस्थितियां और रोजगार से जुड़े मामलों में अधिक सुरक्षा देना है।नई व्यवस्था के अनुसार अब कर्मचारियों को हर महीने की 7 तारीख तक मजदूरी देना अनिवार्य होगा। इससे वेतन में होने वाली देरी की समस्या कम होने की उम्मीद है। साथ ही सरकार ने डिजिटल माध्यम से भुगतान को बढ़ावा दिया है…ताकि लेन-देन का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे और वेतन कटौती या गड़बड़ी जैसी शिकायतें कम हों। यदि किसी कर्मचारी से तय समय से अधिक काम कराया जाता है…तो उसे ओवरटाइम के बदले सामान्य मजदूरी का दोगुना भुगतान मिलेगा। इसके अलावा समान काम के लिए समान वेतन का प्रावधान भी लागू किया गया है…जिससे महिला और पुरुष कर्मचारियों को बराबर मजदूरी सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।सरकार ने औद्योगिक संबंधों से जुड़ी नई नियमावली में भी बदलाव किए हैं। इसके तहत कर्मचारियों और संस्थानों के बीच होने वाले विवादों के समाधान की प्रक्रिया को अधिक आसान और समयबद्ध बनाया जाएगा। बड़े संस्थानों में शिकायतों के निपटारे के लिए विशेष समितियां बनाई जाएगी…ताकि छोटे विवाद जल्दी सुलझ सकें।नई व्यवस्था में ट्रेड यूनियनों की मान्यता, सुलह प्रक्रिया और हड़ताल या तालाबंदी से जुड़े नियम भी स्पष्ट किए गए हैं। वहीं यदि किसी कर्मचारी की नौकरी चली जाती है…तो उसे दोबारा रोजगार पाने में मदद के लिए री-स्किलिंग (नया कौशल प्रशिक्षण) फंड की व्यवस्था भी की जाएगी।सरकार का कहना है कि इन नए नियमों से निर्माण, उद्योग, होटल, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों को लाभ मिलेगा। इससे श्रमिकों के अधिकार मजबूत होंगे और कार्यस्थलों पर बेहतर माहौल बनाने में भी मदद मिलेगी।

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