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नैनीताल। उत्तराखंड में लंबे समय से खाली चल रहे लोकायुक्त पद को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए जरूरी नियमावली तैयार की जानी है। इसके बाद चयन प्रक्रिया के लिए सर्च कमेटी को नाम भेजे जाएंगे।

सरकार ने नियमावली तैयार करने के लिए एक महीने का समय मांगा था….लेकिन हाईकोर्ट ने फिलहाल इतना समय देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सरकार से कहा कि दो हफ्ते के भीतर अब तक हुई प्रगति की जानकारी दी जाए। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई।

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2013 से खाली है लोकायुक्त का पद

यह मामला साल 2021 में हल्द्वानी के गौलापार निवासी रवि शंकर जोशी की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति लंबे समय से नहीं हुई है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि लोकायुक्त संस्थान के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं…जबकि पद लंबे समय से खाली है।

भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जांच का मुद्दा

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में कहा गया कि राज्य में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की स्वतंत्र और प्रभावी जांच के लिए लोकायुक्त जैसी संस्था जरूरी है। याचिका में राज्य की मौजूदा जांच व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

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याचिका में यह तर्क दिया गया है कि लोकायुक्त के सक्रिय होने से भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक अलग मंच उपलब्ध होगा और आम लोगों को भी शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था मिल सकेगी।

अब सरकार को देनी होगी प्रगति रिपोर्ट

हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद अब सरकार को दो सप्ताह के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति से जुड़ी नियमावली की स्थिति कोर्ट के सामने रखनी होगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया को लेकर अदालत में सुनवाई होगी।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि लंबे समय से खाली पड़े लोकायुक्त पद की नियुक्ति की प्रक्रिया कब पूरी होती है।