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हरिद्वार। कांवड़ मेला समाप्त होने के बाद हरिद्वार में कुंभ मेले की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। कुंभ में देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए उत्तर प्रदेश सीमा के मंडावर-छुटमलपुर क्षेत्र में एक भव्य स्वागत द्वार बनाया जा रहा है।

यह प्रवेश द्वार समुद्र मंथन की पौराणिक कथा और कुंभ की धार्मिक परंपरा पर आधारित होगा। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को हरिद्वार पहुंचने से पहले ही कुंभ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक झलक देना है।

मेला प्रशासन के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनने वाले इस स्वागत द्वार के लिए राज्य सरकार ने 204.19 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। करीब साढ़े छह मीटर ऊंचे इस द्वार को हरिद्वार कुंभ के प्रमुख प्रवेश बिंदुओं में विकसित किया जाएगा।

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द्वार की डिजाइन और सजावट में कुंभ से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाया जाएगा।

कुंभ मेले की धार्मिक मान्यता समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ी मानी जाती है। इसी कथा में अमृत कलश का प्रसंग आता है…जिसे कुंभ पर्व की परंपरा से जोड़ा जाता है।

कुंभ मेलाधिकारी सोनिका के अनुसार इसी वजह से स्वागत द्वार के लिए समुद्र मंथन की थीम को चुना गया है। इससे हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को कुंभ की धार्मिक परंपरा और आध्यात्मिक महत्व का अनुभव मिलेगा।

मंडावर क्षेत्र से होकर उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं। ऐसे में यह स्वागत द्वार कुंभ नगरी में प्रवेश करने वाले यात्रियों के लिए पहला प्रमुख आकर्षण बनेगा।

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द्वार के आसपास के क्षेत्र का भी सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को कुंभ क्षेत्र में प्रवेश करते समय आकर्षक और उत्सव जैसा माहौल मिल सकेगा।

मेला प्रशासन के अनुसार स्वागत द्वार का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

कुंभ मेलाधिकारी सोनिका ने स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्माण कार्य तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

यह स्वागत द्वार तैयार होने के बाद हरिद्वार कुंभ की तैयारियों और धार्मिक माहौल को भव्य रूप देने वाली प्रमुख परियोजनाओं में शामिल होगा।