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देहरादून। उत्तराखंड के करीब 900 पैरावेट कर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शनिवार से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। आंदोलन की शुरुआत के साथ ही पैरावेट वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े कर्मचारियों ने पशुपालन निदेशालय, देहरादून में प्रदर्शन किया और अपनी मांगों का ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि पैरावेट कर्मचारी लंबे समय से कृत्रिम गर्भाधान, पशुओं के टीकाकरण, प्राथमिक पशु चिकित्सा, पशु गणना, डाटा एंट्री और सरकार की विभिन्न योजनाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय मिल रहा है और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।

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कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन कार्य करने में कठिनाई होती है…जिससे उनके भुगतान पर भी असर पड़ता है।

संगठन के अनुसार वर्तमान में पहाड़ी क्षेत्रों में प्रति कृत्रिम गर्भाधान 100 रुपये और मैदानी क्षेत्रों में 80 रुपये का भुगतान किया जाता है। सीमित भुगतान के कारण ईंधन, उपकरण, कार्यालय खर्च और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

पैरावेट कर्मियों ने यह भी कहा कि ड्यूटी के दौरान दुर्घटना होने पर कर्मचारियों या उनके परिवारों के लिए किसी प्रकार की आर्थिक सहायता या बीमा की व्यवस्था नहीं है। कई कर्मचारी टीकाकरण अभियान के दौरान घायल हो चुके हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और कल्याण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए।

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कर्मचारियों ने अपनी प्रमुख मांगों में न्यूनतम 25 हजार रुपये मासिक वेतन, उत्तराखंड वेटरिनरी काउंसिल में पंजीकरण, विभागीय भर्तियों में प्राथमिकता, सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं और लोकेशन आधारित ऑनलाइन प्रणाली में सुधार की मांग उठाई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।