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देहरादून: उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारत निर्वाचन आयोग ने चार पूर्व चुनाव प्रत्याशियों के खिलाफ कार्रवाई की है। आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10A के तहत इन चारों को तीन साल के लिए चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किया है।

आयोग के आदेश के बाद निर्धारित अवधि तक ये लोग संसद के किसी सदन या राज्य की विधानसभा अथवा विधान परिषद के सदस्य चुने जाने के लिए पात्र नहीं होंगे।

चकराता विधानसभा क्षेत्र से 2022 का चुनाव लड़ने वाले रामानन्द सिंह को तीन साल के लिए अयोग्य घोषित किया गया है।

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धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी रहे बलबीर कुमार तलवार पर भी तीन साल की रोक लगाई गई है।

राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले कमलेश माथुर को भी आयोग ने इसी अवधि के लिए निरर्हित किया है।

वहीं ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले जगजीत सिंह पर भी तीन साल तक चुनाव लड़ने की रोक रहेगी।

मिली जानकारी के अनुसार, चारों ने 2022 के विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया था। चुनाव के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें अपने चुनावी खर्च का विवरण संबंधित अधिकारियों को देना था।

आयोग की ओर से खर्च का विवरण उपलब्ध कराने के लिए नोटिस भी भेजे गए थे। बताया गया है कि नोटिस के जवाब से आयोग संतुष्ट नहीं हुआ। इसके बाद मामले की जानकारी भारत निर्वाचन आयोग को भेजी गई।

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भारत निर्वाचन आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 10A के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है। इन चारों पर लगाई गई निरर्हता आदेश जारी होने की तारीख से तीन साल तक प्रभावी रहेगी।

इस कार्रवाई के चलते संबंधित चारों व्यक्ति इस अवधि के दौरान संसद या राज्य की विधानसभा अथवा विधान परिषद के लिए चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होंगे।