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नैनीताल: उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को 12 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि बड़ी संख्या में डॉक्टरों के तबादले किए जा रहे हैं…तो उनकी जगह नए डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है। सरकार से इस संबंध में विस्तृत जानकारी और सुझाव भी मांगे गए हैं।

सुनवाई के दौरान नैनीताल के सेनेटोरियम अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने की योजना पर भी चर्चा हुई। सरकार ने बताया कि इस परियोजना के लिए 250 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार कर वित्त विभाग को भेजी जा चुकी है। बजट मंजूर होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। कोर्ट ने इस मामले में एक सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

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न्यायमित्र ने कोर्ट को बताया कि हाल ही में सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज और बीडी पांडे जिला अस्पताल के कई वरिष्ठ डॉक्टरों का तबादला कर दिया गया है…लेकिन उनकी जगह नए विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं भेजे गए हैं।

इससे मरीजों को इलाज में परेशानी हो रही है। कोर्ट ने इस मुद्दे पर भी सरकार से जवाब मांगा है।इसी दौरान पिथौरागढ़ जिले में मेडिकल वेस्ट के गलत तरीके से निस्तारण के मामले पर भी सुनवाई हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार को जिले में कॉमन मेडिकल वेस्ट प्लांट के लिए उपयुक्त स्थान तय करने के निर्देश दिए हैं

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साथ ही उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूकेपीसीबी) को जिले के सभी अस्पतालों की जांच कर चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट कोर्ट में सौंपने के आदेश दिए गए हैं। अस्पतालों के कर्मचारियों को मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण की ट्रेनिंग देने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है…कि जिले में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कई अस्पताल और पैथोलॉजी लैब जैविक कचरा खुले में, नदी-नालों या कूड़ेदानों में फेंक रहे हैं। इससे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। कोर्ट ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए सरकार और संबंधित विभागों से जल्द कार्रवाई करने को कहा है।