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देहरादून। उत्तराखंड सरकार राज्य के जंगलों और बाघों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन की तैयारी कर रही है। इस विशेष फोर्स में अग्निवीरों को शामिल करने की योजना पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। हालांकि उनकी नियुक्ति का अंतिम स्वरूप अभी तय नहीं हुआ है।

वन विभाग के अनुसार यह फोर्स कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व समेत अन्य संवेदनशील वन क्षेत्रों में तैनात की जाएगी। इसका उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा, जंगलों की निगरानी, अवैध शिकार पर रोक और गश्त को मजबूत करना है।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि सरकार अग्निवीरों को इस फोर्स में अधिक से अधिक अवसर देने के विकल्पों पर काम कर रही है। अधिकारियों को इसके लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर सभी पहलुओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं।

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वन विभाग पहले ही टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। इसके लिए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को 81 पदों का प्रस्ताव भेजा गया है। मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के अनुसार इनमें से लगभग 10 प्रतिशत पद अग्निवीरों के लिए आरक्षित किए जा सकते हैं।

हालांकि एक चुनौती यह भी है कि अग्निवीर योजना का पहला बैच दिसंबर 2026 में अपनी चार साल की सेवा पूरी करेगा। यदि भर्ती प्रक्रिया इससे पहले पूरी हो जाती है तो पहले बैच के अग्निवीर इसमें शामिल नहीं हो पाएंगे। इसी वजह से सरकार ऐसा समाधान तलाश रही है, जिससे अधिक से अधिक अग्निवीरों को इस फोर्स में अवसर मिल सके।

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प्रस्तावित टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के जवान जंगलों में गश्त करने, वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अवैध गतिविधियों पर नजर रखने का काम करेंगे। सरकार का मानना है कि सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त अग्निवीर अपने अनुशासन, शारीरिक क्षमता और अनुभव के दम पर इस जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभा सकते हैं।