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नैनीताल :::- महिला अध्ययन केंद्र कुमाऊं विश्वविद्यालय एवं राजनीति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वाधान में शुक्रवार को समान नागरिक संहिता समय की मांग विषय पर एक दिवसीय वेबीनार का आयोजन किया गया। इस दौरान वेबीनार की मुख्य संयोजक महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक और राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो.नीता बोरा शर्मा की संयोजन में इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन हुआ। संगोष्ठी में प्रो. नीता बोरा शर्मा ने बताया कि समान नागरिक संहिता आज समय की मांग है लेकिन इसके सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं और इसको लागू करते समय भारत में विभिन्नता में एकता की भावना को ध्यान में रखते हुए हमें उसका क्रियान्वयन करना चाहिए उन्होंने बताया कि आज सरकार के द्वारा इस संदर्भ में चार सदस्यों की समिति भी बनाई गई है जो केंद्रीय मंत्री किरण जीजू की अध्यक्षता में बनाई गई है और उसमें महिला आदिवासी, राज्यों से जुड़े मुद्दे और कानून से संबंधित मामलों को अलग-अलग सदस्यों को सौंपा गया है।

वेबीनार का शुभारंभ कुलपति प्रो.दीवान सिंह रावत के उद्बोधन के साथ किया गया। प्रो. रावत ने अपने संबोधन में यूसीसी के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला व वेबिनार के आयोजन के लिए संयोजक प्रो.नीता बोरा शर्मा समेत सभी को अपनी शुभकामनाएं दी व कहा कि संविधान की प्रस्तावना की मंशा के अनुरूप आज की यह संगोष्ठी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति राजेश टंडन रहे जो वर्तमान में एमिटी लॉ एकैडमी के वाइस चेयरमैन भी है उन्होंने समान नागरिक संहिता क्या है न्यायपालिका के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण बातों में कई महत्वपूर्ण निर्णय हुए हैं जिसका विस्तार से उन्होंने विभिन्न वादों का उल्लेख करते हुए और संविधान की विभिन्न अनुच्छेदों की जानकारी देते हुए विस्तार से अपना व्याख्यान दिया। जस्टिस टंडन ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय विधि आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा समेत UCC पर संविधान व सुप्रीम कोर्ट के पक्ष को विस्तार से बताया वह UCC पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर व संविधान सभा के विचारों से सभी को अवगत कराया व कहा कि जब विधि आयोग के द्वारा भी देश के हित में स्वीकार किया गया है ऐसी स्थिति में इसको लागू करने में क्या बाधाएं हैं। इस पर इस संगोष्ठी में विचार-विमर्श होना चाहिए।

संगोष्ठी को विधि भारतीय परिषद की महासचिव पूर्व लोकसभा अधिकारी प्रो.संतोष खन्ना के द्वारा भी संबोधित किया गया संतोष खन्ना ने अपने संबोधन में बताया कि UCC के लागू होने पर कैसे सामाजिक न्याय और समानता व भेदभाव को दूर किया जा सकता है। वह उन्होंने अपने संबोधन में UCC को तत्काल प्रभाव से लागू करने की भी जोरदार वकालत की। वह इसे वर्तमान समय की मांग बताया नारी का गौरव और सम्मान समान नागरिक संहिता पर निहित इस विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार भारत के संविधान में नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत समान नागरिक संहिता को लागू किया जाना चाहिए। अनुच्छेद 44 में की गई है देश के विभिन्न कानूनों की जानकारी भी उनके द्वारा दी गई।

इस अवसर पर प्रो.अनुपमा कौशिक विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान विभाग एवं लोक प्रशासन विभाग हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश के द्वारा भी अपना व्याख्यान यूसीसी और जेंडर जस्टिस पर दिया गया प्रोफेसर कौशिक ने भारत के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की जो कानून है उनकी चर्चा की और बताया कि हिंदुओं के लिए कौन से कानून बने हैं मुसलमानों के लिए कौन से हैं आदिवासियों के लिए किस प्रकार की स्थितियां हैं तो इन सब बातों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि क्यों देश के लिए समान प्रकार के कानून बनते हैं उन्होंने कहा कि यह भ्रम समान नागरिक संहिता लागू होने से हम अपने अपने धर्मों के अनुरूप कार्य नहीं कर सकते ऐसा नहीं हैं सभी लोग अपने धर्म में जो आस्था रखते हैं उस आस्था को इस कानून के अंतर्गत भी बनाया रखा जा सकेगा कई उदाहरण उन्होंने इसमें प्रतिभागियों को दिए। अनुपमा कौशिक ने अपने संबोधन में UCC के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की उन्होंने बताया कि क्रिमिनल कानून तो पूरे भारतवर्ष में सभी पर एक समान रूप से लागू होते हैं, परंतु सिविल कानून धर्म के आधार पर अलग-अलग लागू होते हैं। वह इसके अलावा उन्होंने हिंदू कोड बिल समेत कई विषय पर अपना व्याख्यान दिया।

वहीं राजनीति विज्ञान से प्रो.कल्पना अग्रहरि के द्वारा समान नागरिक संहिता के सम्मुख आने वाली विभिन्न चुनौतियों के बारे में बताते हुए उसके निदान पर भी विस्तार से प्रकाश डाला व बताया कि UCC के लागू होने पर इसके समाज पर क्या प्रभाव पड़ेंगे, इसे समाज ने अल्पसंख्यक बनाम बहुसंख्यक का मुद्दा बना दिया है जो कि सरासर गलत है UCC के लागू होने पर आने वाली चुनौतियों से भी सभी को अवगत कराया।

डॉ.दीपाक्षी जोशी प्रिंसिपल डॉ. राजेंद्र प्रसाद लॉ कॉलेज के द्वारा विस्तार से यह बताया गया की कहां पर कानून में विसंगतियां हैं और कानून की विसंगतियों को दूर करते हुए समान नागरिक संहिता लागू करना अनिवार्य है। इस वेबीनार के अंतर्गत डॉ.हरदेश कुमार शर्मा के द्वारा समान नागरिक संहिता पर अपने विचार व्यक्त किया।

इस दौरान कार्यक्रम में डॉ. भूमिका प्रसाद, डॉ. पंकज सिंह नेगी,डॉ. प्रसन्ना मिश्रा, डॉ.रूचि मित्तल ,कृति तिवारी ,खुशबू आर्य, अविनाश जाटव, धीरज ,डॉक्टर मोहित रौतेला,सुहाल व भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय की प्रधानाचार्य बिशन सिंह मेहता, निशांत स्कूल के प्रधानाचार्य तारा बोरा समेत अन्य शोधार्थी मौजूद रहें है।

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