टिहरी गढ़वाल: सकलाना क्षेत्र के हटवाल गांव की रहने वाली अंजलि हटवाल ने अपने हुनर को रोजगार का जरिया बना लिया है। अंजलि हाथों से राखी, हैंडबैग, स्वेटर और कई तरह की हस्तशिल्प सामग्री तैयार करती हैं।
यूट्यूब से सीखी बुनाई और हस्तशिल्प कला
अंजलि ने बताया कि उन्होंने इस काम के लिए किसी संस्थान से प्रशिक्षण नहीं लिया। उन्होंने यूट्यूब वीडियो देखकर बुनाई और हस्तशिल्प का काम सीखा। लगातार अभ्यास के बाद उन्होंने अलग-अलग तरह के सामान बनाना शुरू किया…जिन्हें लोग पसंद भी कर रहे हैं।
बिना सरकारी मदद के शुरू किया काम
अंजलि फिलहाल किसी सरकारी संस्था या एनजीओ से जुड़े बिना अपने स्तर पर काम कर रही हैं। सामान तैयार करने से लेकर लोगों तक पहुंचाने तक की जिम्मेदारी वह खुद संभालती हैं अब उनका लक्ष्य इस काम को और आगे बढ़ाना और दूसरी महिलाओं व युवतियों को भी इससे जोड़ना है।
गांव की युवतियों के लिए बनीं मिसाल
अंजलि की कहानी ग्रामीण क्षेत्र की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है…जो अपने हुनर से घर बैठे रोजगार शुरू करना चाहती हैं। उनका प्रयास बताता है…कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और सीखने की इच्छा से आत्मनिर्भर बना जा सकता है।
सामाजिक कार्यकर्ता अनिल हटवाल का कहना है कि पहाड़ के गांवों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है जरूरत सिर्फ सही मंच और प्रोत्साहन की है। उन्होंने अंजलि के प्रयास को युवाओं और खासकर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।
अंजलि की यह पहल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक छोटी लेकिन मजबूत शुरुआत है। उनके बनाए हस्तनिर्मित सामान न केवल उनकी पहचान बना रहे हैं…बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी अपने हुनर को रोजगार में बदलने की प्रेरणा दे रहे हैं।
