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नैनीताल :: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य में प्लास्टिक निर्मित कचरे पर पूर्ण रूप प्रतिबंध लगाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले को सुनने के बाद मुख्य न्यायधीश विपिन सांघी व न्यायमुर्ति आरसी खुल्बे की खण्डपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम इस प्रदेश को साफ सुथरा देखना चाहते है इसलिए समाज को जागरूक करना जरूरी है। कोर्ट ने कमिश्नर कुमाऊँ और गढ़वाल को निर्देश दिए है कि पूर्व के आदेशों का पालन करते हुए सभी जगहों में सॉलिड वेस्ट फैसिलिटी का संचालन अगली तिथि तक करना सुनिश्चित करें।

  1. कोर्ट ने राज्य सरकार से सभी प्लास्टिक पैकेजिंग कम्पनियां जो उत्तराखंड के अंदर कार्यरत है उनके इपीआर प्लान सेंटर पोर्टल पर अपलोड करने को कहा है। 3. कोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से उनके यहां रजिस्टर्ड कम्पनियां जो उत्तराखंड में कायर्रत है उनका कल्ट बैग प्लान राज्य प्रदूषण बोर्ड के साथ सांझा करने को कहा है।
  2. कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिए है कि राज्य की सीमा में जितने भी वाहन आते है उनमें पोर्टेबल डस्टबिन लगाने की व्यवस्था नियम बनाकर करें। 5. कोर्ट ने सभी कम्पनियों को आदेश दिए है कि जिन्होंने अपना रजिस्ट्रेशन राज्य प्रदूषण बोर्ड में नही किया है वे 15 दिन के भीतर अपना रजिस्ट्रेशन अवश्य करा लें।
    आज सुनवाई के दौरान कमिश्नर कुमायूँ, कमिश्नर गढ़वाल, सचिव वन एवं पर्यावरण व मेम्बर सैकेट्री पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड व्यक्गित रूप से पेस हुए। कमीशनर कुमायूँ के द्वारा कोर्ट को अवगत कराया कि कुमायूँ मंडल में 782 वेस्ट स्पॉट है। जिनमे से 500 स्पाटों को साफ कर दिया है। कूड़ा निस्तारण के लिए मंडल के जिला अधिकारियों व उपजिला अधिकारियों को आदेश दिए गए है। इस सम्बंध में अधिकरियो ने मंडल में 3101 दौरे भी किये है। कमिश्नर गढ़वाल की ओर से कहा गया कि मंडल के अधिकाशं जिलों में कूड़े का निस्तारण रुद्रपयाग व चमोली को छोड़कर कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई फरवरी दूसरे सप्ताह की तिथि नियत की है। मामले के अनुसार अल्मोड़ा हवलबाग निवासी जितेंद्र यादव ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि राज्य सरकार ने 2013 में बने प्लास्टिक यूज व उसके निस्तारण करने के लिए नियमावली बनाई गई थी। परन्तु इन नियमों का पालन नही किया जा रहा है। 2018 में केंद्र सरकार ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स बनाए गए थे जिसमे उत्पादकर्ता, परिवहनकर्ता व बिक्रेताओ को जिम्मेदारी दी थी कि वे जितना प्लास्टिक निर्मित माल बेचेंगे उतना ही खाली प्लास्टिक को वापस ले जाएंगे। अगर नही ले जाते है तो सम्बंधित नगर निगम , नगर पालिका व अन्य फण्ड देंगे जिससे कि वे इसका निस्तारण कर सकें। परन्तु उत्तराखंड में इसका उल्लंघन किया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में प्लास्टिक के ढेर लगे हुए है और इसका निस्तारण भी नही किया जा रहा है।
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